हम लोग जो मोबाइल इस्तेमाल करते हैं... उसमें मुख्यतः दो भाग होते हैं.....
एक होता है हार्डवेयर और एक सॉफ्टवेयर।
सामान्य भाषा में कहा जाए तो मोबाइल के जिस भी पार्ट्स को देख सकते हैं, छू सकते हैं और पकड़ सकते हैं... वो मोबाइल का हार्डवेयर होता है।
और, मोबाइल के प्रोग्राम्स सॉफ्टवेयर कहलाते हैं।
तो, मोबाइल के os एंड्रॉइड, apps, फेसबुक, ट्विटर आदि मोबाइल के सॉफ्टवेयर ही होते हैं।
सॉफ्टवेयर को हम छू नहीं सकते या पकड़ नहीं सकते... बल्कि, उसे सिर्फ महसूस कर सकते हैं।
और, मोबाइल से किसी भी काम को परफॉर्म हम सॉफ्टवेयर के जरिये ही करते हैं...!
लेकिन, सॉफ्टवेयर में एक बड़ी प्रॉब्लम्स होती है कि.... दुनिया का कोई भी सॉफ्टवेयर अपने आप में सम्पूर्ण और अभेद्य नहीं होता है।
इसीलिए, कंपनियां और सॉफ्टवेयर डेवलपर... अपने सॉफ्टवेयर की उन कमियों को दूर करते हुए सॉफ्टवेयर को समय समय पर अपडेट करते रहती है...!
जिसका नोटिफिकेशन हमें फोन में आता रहता है... और, हमलोग अपने फोन एवं एप्स को अपडेट करते रहते हैं।
इसीलिए, सबसे अच्छी कंपनी और App वे माने जाते हैं जो अपने सॉफ्टवेयर को अपडेट करते रहें।
क्योंकि, अपडेशन से एक तो उपयोगकर्ता को नए-नए फीचर्स मिलते हैं वहीं दूसरी तरफ उससे हैकिंग का खतरा भी बेहद कम हो जाता है।
सुरक्षा के लिहाज से तो कुछेक app एंड्राइड के पुराने वर्जन में काम भी नहीं करती है।
क्योंकि, बिना अपडेशन के किसी भी सॉफ्टवेयर अथवा प्रोग्राम को हैक बेहद आसान हो जाता है।
और , हैकिंग का सबसे कॉमन तरीका फिशिंग टेक्निक मानी जाती है...
जबकि, हार्डवेयर में कोई अपडेशन नहीं होता है...
मतलब कि एक बार जो बन गया सो बन गया।
यही... मोबाइल, लैपटॉप, कम्प्यूटर समेत हरेक इलेट्रॉनिक सामान के काम करने का सिस्टम है।
और, काम करने का ये सिस्टम सिर्फ इलेट्रॉनिक गैजेट तक ही सीमित नहीं है...
बल्कि, इंसान और समाज के रूप में भी ये काम करता है।
मतलब कि.... इंसानी शरीर एक हार्डवेयर है...
और, उसका धर्म.... सॉफ्टवेयर।
कहने का तात्पर्य है कि... हार्डवेयर तो सबका एक ही है क्योंकि सब इंसान ही हैं।
लेकिन, अंतर उनके सॉफ्वेयर अर्थात धर्म में है....
क्योंकि, जिसका सॉफ्टवेयर जैसा होगा वो उसी तरह से सोचेगा और वैसा ही परफॉर्म करेगा।
और, साफ्टवेयर की सबसे बड़ी खासियत ये होती है कि... सॉफ्टवेयर को बदला जा सकता है या उसे अपडेट/अपग्रेड किया जा सकता है...!
लेकिन, क्या हो कि... अगर कोई मोबाइल/कम्प्यूटर अपडेट इंस्टॉल ही न करने लगे...???
अगर कोई मोबाइल /कम्प्यूटर/सॉफ्टवेयर अपडेट होना बंद हो जाये तो उसकी हैकिंग बेहद आसान हो जाएगी क्योंकि कुछ समय बाद उसकी टेक्नोलॉजी बेहदपुरानी हो चुकी होगी...!
इसी कारण, फिशिंग के जरिए उसे आसानी से शिकार बनाया जा सकता है।
और... मजे की बात है कि.... दुनिया में एक मजहब ऐसा है जो 1400 साल पुराने सॉफ्टवेयर पर ही काम कर रहा है।
हालांकि... उस सॉफ्टवेयर का निर्माता महामद बेहद चालाक इंसान था....
लेकिन, उसने अपने बनाए सॉफ्टवेयर के कुछ बग छोड़ दिये हैं..
और, वो बग है.... हम ही अंतिम सॉफ्टवेयर निर्माता है.....
एवं, मेरे बाद इस सॉफ्टवेयर में किसी प्रकार की छेड़छाड़ कॉपीराइट्स का उल्लंघन माना जायेगा।
और, दूसरा बग है कि... ये एक आसमानी सॉफ्टवेयर है।
अब आपके पास... दो महत्वपूर्ण इनपुट हैं उस सॉफ्टवेयर के संबंध में.....
कि, वो सॉफ्टवेयर काफी पुराना है और दूसरा कि उस सॉफ्टवेयर को चाह कर भी अपडेट अथवा अपग्रेड नहीं किया जा सकता।
ये बहुत ही बड़ा इनपुट है.. क्योंकि, ऐसे सॉफ्टवेयर में वायरस का इंजेक्शन बेहद आसान होता है।
जरूरत है तो सिर्फ एक परफेक्ट फिशिंग की...!
और, चूँकि... उस सॉफ्टवेयर की अपडेशन संभव नहीं है इसीलिए दुनिया की कोई ताकत उस वायरस को रिमूव नहीं कर पायेगी।
और, हाँ... फिशिंग होता है... Malicious link.
जिसमें कुछ लॉटरी, पैसे, नौकरी आदि का लालच दिया रहता है..
और, जैसे ही लोग लालच में आकर उस लिंक को क्लिक करते हैं कि मालवेयर फोन/कम्प्यूटर में इंस्टॉल हो जाता है।
और, सिस्टम हैक हो जाता है।
उसके बाद सिस्टम के मालिक को लगता है कि सिस्टम वो चला रहा है लेकिन असल में सिस्टम वो नहीं बल्कि हैकर्स चला रहे होते हैं।
अभी तक... आपका सिस्टम वामपंथियों द्वारा हैक है...
इसीलिए, आप अपने सिस्टम को अपडेट करके वायरस को रिमूव कर दो।
फिर, वायरस आप उनके सिस्टम में डाल दो।
बस, आपका काम हो गया.....👍
और, दाढ़ी वाले बाबा वही कर रहे हैं....
और, वो समय दूर नहीं है जब हम दुश्मनों के पूरे सिस्टम को हैक करके क्रैश कर देंगे।
आशा है कि बात समझ आ गई होगी।
जय श्रीराम।।